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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Friday, February 26, 2016

Gorakh-Baani (Sabdi-17)

अरधै जाता उरधै धरै, कांम दगध जे जोगी करे 
तजै अल्यंगन काटै माया, ताका बिसनु पशालै पाया I


नीचे की गति वाले रेतस (शुक्र) को ऊपर की और प्रेरित करे, ऐसा उर्ध्वरेता होकर जो काम को भस्म कर देता हे, कामिनी का आलिंगन छोड़ देता हे और माया को काट डालता है  जिसके चरण पखारने से गंगा निकलती हे, वह विष्णु भी उस जोगी के चरण धोता है 

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