अवधू आहार तोड़ो निद्रा मोड़ो कबहुँ न होइगा रोगी I
छठे छ मासे काया पल्टिबा ज्यूँ को को बिरला बिजोगी II
हे अवधूत ! आहार तोड़ो, मिताहार करो, नींद को अपने पास न फटकने दो, छठे छ मासे कायाकल्प किया करो I इससे तुम कभी रोगी नहीं होओगे I कोई कोई विरले जोगी ऐसा कर सकते है I