मान्या सबद चुकाया दंद I निहचै राजा भरथरी परचै गोपीचंद I
निहचै नरवै भए निर्दंद I परचै जोगी परमानन्द II
जिसने गुरु वचनो को माना उसकी दुविधा नष्ट हो गयी I इसी निश्चय ने राजा भर्तहरी को बनाया, उन्हें सिद्धि दी और राजा गोपीचंद को ब्रह्म परिचय यानी आत्म साक्षात्कार कराया I इसी निश्चय ने नरपतियों को निर्द्वंद बना दिया जिससे आत्म साक्षात्कार के द्वारा वे पूर्ण परमानन्द प्राप्त करने वाले योगी हो गए I
निहचै नरवै भए निर्दंद I परचै जोगी परमानन्द II
जिसने गुरु वचनो को माना उसकी दुविधा नष्ट हो गयी I इसी निश्चय ने राजा भर्तहरी को बनाया, उन्हें सिद्धि दी और राजा गोपीचंद को ब्रह्म परिचय यानी आत्म साक्षात्कार कराया I इसी निश्चय ने नरपतियों को निर्द्वंद बना दिया जिससे आत्म साक्षात्कार के द्वारा वे पूर्ण परमानन्द प्राप्त करने वाले योगी हो गए I
No comments:
Post a Comment