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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Friday, February 26, 2016

Gorakh- Baani (Sabdi - 15)

मान्या सबद चुकाया दंद I निहचै राजा भरथरी परचै गोपीचंद I 
निहचै नरवै भए निर्दंद I परचै जोगी परमानन्द II 


जिसने गुरु वचनो को माना उसकी दुविधा नष्ट हो गयी I इसी निश्चय ने राजा भर्तहरी को बनाया, उन्हें सिद्धि दी और राजा गोपीचंद को ब्रह्म परिचय यानी आत्म साक्षात्कार कराया I इसी निश्चय ने नरपतियों को निर्द्वंद बना दिया जिससे आत्म साक्षात्कार के द्वारा वे पूर्ण परमानन्द प्राप्त करने वाले योगी हो गए I

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