Featured Post

Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Monday, February 29, 2016

Gorakh-Baani (Sabdi-19)

धन जोवन की करै न आस, चित्त न राशै कामनि पास 
नाद बिन्द जाकै घटि जरै, ताकि सेवा पारबती करै I

जो धन यौवन की आशा नहीं करता, स्त्री में मन नहीं लगाता, जिसके शरीर में 

नाद और बिन्द जीर्ण होते रहते है, पारवती भी उसकी सेवा करती है 

No comments:

Post a Comment