धन जोवन की करै न आस, चित्त न राशै कामनि पास I
नाद बिन्द जाकै घटि जरै, ताकि सेवा पारबती करै II
जो धन यौवन की आशा नहीं करता, स्त्री में मन नहीं लगाता, जिसके शरीर में
नाद और बिन्द जीर्ण होते रहते है, पारवती भी उसकी सेवा करती है I
नाद बिन्द जाकै घटि जरै, ताकि सेवा पारबती करै II
जो धन यौवन की आशा नहीं करता, स्त्री में मन नहीं लगाता, जिसके शरीर में
नाद और बिन्द जीर्ण होते रहते है, पारवती भी उसकी सेवा करती है I
No comments:
Post a Comment