अजपा जपै सुनि मन धरै, पांचों इंद्री निग्रह करै I
ब्रह्म अग्नि में होमै काया, तास महादेव बन्दे पाया II
जो अजपा का जाप करता है, ब्रह्मरंध्र (शून्य) में मन को लीन किये रहता है, पांचों इन्द्रियों को अपने वश में रखता है, ब्रह्मानुभूति रूप अग्नि में अपने भौतिक अस्तित्व यानी काया की आहुति कर डालता है, योगीश्वर महादेव भी उसके चरणो की वंदना करता है I
ब्रह्म अग्नि में होमै काया, तास महादेव बन्दे पाया II
जो अजपा का जाप करता है, ब्रह्मरंध्र (शून्य) में मन को लीन किये रहता है, पांचों इन्द्रियों को अपने वश में रखता है, ब्रह्मानुभूति रूप अग्नि में अपने भौतिक अस्तित्व यानी काया की आहुति कर डालता है, योगीश्वर महादेव भी उसके चरणो की वंदना करता है I
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