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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Thursday, February 25, 2016

Gorakh Baani ( Sabdi - 14)

उत्पति हिन्दू जरणा जोगी अकली परि पीर मुसलमानी I
ते राह चिन्हों को काजी मुलां ब्रह्मा बिस्नु महादेव मांनी II

उतपति से हम हिन्दू है, जरणा के कारण जोगी है और अक्ल से मुसलमानी पीर I जोगी हिन्दू समुदाय से ही चेला मुंडाया करते है I योग सिद्धि के लिए ये आवश्यक है की गुरुमुख से पाये हुए ज्ञान को मनन , चिंतन और साधना के द्वारा स्वानुभव में ला सके I मुसलमानो में जिस प्रकार पीरो का मान है, उसी प्रकार योग मार्ग में गुरुओ का I नाथी ने तो पीर शब्द को ही स्वीकार कर लिया है I उनके महंत महंत नहीं पीर कहलाते है I किन्तु इसका अभिप्राय नहीं कि वस्तुतः कोई तात्विक मुसलमानी प्रभाव उन पर पड़ा हो I है मुल्लाओ और काजियों ! उस मार्ग को पहिचानो जिसे ब्रह्मा, विष्णु और महादेव तक ने माना है I

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