नाथ कहंता सब जग नाथ्या गोरष कहता गोई I
कलमा का गर मुहमद होता पहलै मुआ सोई II
शब्दों के बाह्यार्थ पर नहीं जाना चाहिए, उनका तत्वार्थ ग्रहण करना चाहिए I इसी तत्वार्थ दृष्टि के अभाव में माया को अपने वश में रखने वाले 'नाथ' का नाम लेते हुए भी सारा संसार माया के द्वारा नाथ डाला गया I गोरख का नाम लेते हुए भी आध्यात्मिक जीवन गुप्त ही रह गया I इसी प्रकार खाली कलमा के शब्द भी किसी का उद्धार नहीं कर सकते I कलमा को चलाने वाले मुहम्मद भी बचे न रह सके I
कलमा का गर मुहमद होता पहलै मुआ सोई II
शब्दों के बाह्यार्थ पर नहीं जाना चाहिए, उनका तत्वार्थ ग्रहण करना चाहिए I इसी तत्वार्थ दृष्टि के अभाव में माया को अपने वश में रखने वाले 'नाथ' का नाम लेते हुए भी सारा संसार माया के द्वारा नाथ डाला गया I गोरख का नाम लेते हुए भी आध्यात्मिक जीवन गुप्त ही रह गया I इसी प्रकार खाली कलमा के शब्द भी किसी का उद्धार नहीं कर सकते I कलमा को चलाने वाले मुहम्मद भी बचे न रह सके I
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