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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Thursday, February 25, 2016

Gorakh Baani ( Sabdi-12)

सारमसारं गहर गम्भीरं गगन उछलिया नादं I
माणिक पाया फेरी लुंकाया झूठा बाद-बिबादम II


साधना के द्वारा ब्रह्मरंध्र तक पहुँचने पर अनाहत नाद सुनाई दिया , जो सार का भी सार और गंभीर से गंभीर हे इससे ब्रह्ममानुभूति रूप माणिक्य हाथ लगा परन्तु वह माणिक्य व्यक्तिगत साधना से प्राप्त होने पर भी दुनिया के लिए छिपा ही रहा वह स्वयंवेद्य हे, वाणी से किसी को बताया नहीं जा सकता इस अनुभूति के मिल जाने पर ज्ञात हुआ की सारा वाद विवाद झूठ हे सच्ची तो केवल अनुभूति हे I

1 comment:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद , आप जैसे लोगों के सहयोग से ही ज्ञान गंगा अविरल बहती रहती है।

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