सारमसारं गहर गम्भीरं गगन उछलिया नादं I
माणिक पाया फेरी लुंकाया झूठा बाद-बिबादम II
साधना के द्वारा ब्रह्मरंध्र तक पहुँचने पर अनाहत नाद सुनाई दिया , जो सार का भी सार और गंभीर से गंभीर हे I इससे ब्रह्ममानुभूति रूप माणिक्य हाथ लगा I परन्तु वह माणिक्य व्यक्तिगत साधना से प्राप्त होने पर भी दुनिया के लिए छिपा ही रहा I वह स्वयंवेद्य हे, वाणी से किसी को बताया नहीं जा सकता I इस अनुभूति के मिल जाने पर ज्ञात हुआ की सारा वाद विवाद झूठ हे सच्ची तो केवल अनुभूति हे I
माणिक पाया फेरी लुंकाया झूठा बाद-बिबादम II
साधना के द्वारा ब्रह्मरंध्र तक पहुँचने पर अनाहत नाद सुनाई दिया , जो सार का भी सार और गंभीर से गंभीर हे I इससे ब्रह्ममानुभूति रूप माणिक्य हाथ लगा I परन्तु वह माणिक्य व्यक्तिगत साधना से प्राप्त होने पर भी दुनिया के लिए छिपा ही रहा I वह स्वयंवेद्य हे, वाणी से किसी को बताया नहीं जा सकता I इस अनुभूति के मिल जाने पर ज्ञात हुआ की सारा वाद विवाद झूठ हे सच्ची तो केवल अनुभूति हे I
बहुत बहुत धन्यवाद , आप जैसे लोगों के सहयोग से ही ज्ञान गंगा अविरल बहती रहती है।
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