हसिबा षेलिबा धरिबा ध्यान I अहनिसि कथिबा ब्रह्म गियान I
हँसे षेले न करे मन भंग I ते निहचल सदा नाथ के संग II ८ II
हँसना, खेलना और ध्यान धरना चाहिए I रात दिन ब्रह्म ज्ञान का कथन करना चाहिए I
इस प्रकार (संयमपूर्वक ) हँसते - खेलते हुए जो अपने मन को भंग नहीं करते वे निश्चल होकर ब्रह्म के साथ रमण करते है I
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