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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Saturday, June 22, 2013

Gorakh-Baani(Sabdi-8)

हसिबा षेलिबा धरिबा ध्यान I अहनिसि कथिबा ब्रह्म गियान I 
हँसे षेले न करे मन भंग I ते निहचल सदा नाथ के संग II ८ II 

हँसना, खेलना और ध्यान धरना चाहिए I रात दिन ब्रह्म ज्ञान का कथन करना चाहिए I 
इस प्रकार (संयमपूर्वक ) हँसते - खेलते हुए जो अपने मन को भंग नहीं करते वे निश्चल होकर ब्रह्म के साथ रमण करते है I 

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