वेद कतेब न षाणी बाणी I सब ढंकी तलि आंणी I
गगनि सिषर महि सबद प्रकास्या I तहं बूझे अलष बिनांणी I
परब्रह्म का ठीक ठीक निर्वाचन न वेद कर पाये है, न किताबी धर्मो की पुस्तके और न चार खानि की वाणी I ये सब तो उसे आच्छादन के नीचे ले आये है I उन्होंने तो सत्य को प्रकट करने के बदले उसके ऊपर आवरण डाल दिया I यदि ब्रह्म स्वरुप का यथार्थ ज्ञान तुम्हे अभीष्ट है तो ब्रह्मरंध्र यानी गगन शिखर में समाधी द्वारा जो शब्द प्रकाश में आता है, उसमे विज्ञानं रूप अलक्ष्य का ज्ञान प्राप्त करो I
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