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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Friday, August 23, 2013

Gorakh-Baani (Sabdi-9)

महंमद महंमद न करि काजी महंमद का विष बिचारं I
महंमद हाथि करद जे होती लोहै घड़ी न सारं II

हे काजी ' मुहम्मद  मुहम्मद ' न करो I क्योकि तुम मुहम्मद को जानते नहीं हो I तुम समझते हो की जीव हत्या करते हुए हम  मुहम्मद के मार्ग का अनुसरण करते है परन्तु मुहम्मद का विचार बहुत गंभीर और कठिन है I मुहम्मद के हाथ में जो छुरी थी वह न लोहे की गढ़ी हुई थी, न इस्पात की, जिससे जीवहत्या होती है I 

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