महंमद महंमद न करि काजी महंमद का विष बिचारं I
महंमद हाथि करद जे होती लोहै घड़ी न सारं II
हे काजी ' मुहम्मद मुहम्मद ' न करो I क्योकि तुम मुहम्मद को जानते नहीं हो I तुम समझते हो की जीव हत्या करते हुए हम मुहम्मद के मार्ग का अनुसरण करते है परन्तु मुहम्मद का विचार बहुत गंभीर और कठिन है I मुहम्मद के हाथ में जो छुरी थी वह न लोहे की गढ़ी हुई थी, न इस्पात की, जिससे जीवहत्या होती है I
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