Featured Post

Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Thursday, June 6, 2013

Gorakh-Baani (Sabdi -1 )

बसती न सुन्यम, सुन्यम न बसती अगम अगोचर ऐसा I 
गगन सिषर महि बालक बोलै ताका नौव धरहुगे कैसा II १ II 

परम तत्त्व तक किसी की पहुच नहीं है I (अगम) I व इन्द्रियों का विषय नहीं है (अगोचर) I
वह  ऐसा है की न हम उसे बस्ती कह सकते है, और न शून्य I न यह कह सकते है की वह कुछ है (बस्ती) और न यह की वह कुछ नहीं है (शून्य) I वह भाव (बस्ती) और अभाव (शून्य), सत और असत दोनों से परे है I वह आकाश मंडल में बोलने वाला बालक है I ( आकाश मंडल में बोलने वाला इसलिए कहा की शून्य अथवा आकाश या  ब्रह्मरंध्र में ही ब्रह्म का निवास माना जाता है, वही पहुचने पर ब्रह्म साक्षात्कार हो सकता है I वही आत्मा को ढूंढना चाहिए I बालक इसलिए की जिस प्रकार बालक पाप पुण्य से अछुता है, उसी प्रकार परमात्मा भी I जरा मरण से दूर, काल से अस्पृष्ट सतत बाल स्वरुप ही योगियों का साध्य आदर्श है I इसीलिए " गोरख गोपालं " "बूढा बालं " कहे जाते है I उनका नाम कैसे रख सकते है ? क्योकि वह तो नाम और रूप दोनों ही उपाधियो से परे है I 

No comments:

Post a Comment