भरया ते थीरं झलझलन्ति आधा I
सिद्धें सिद्ध मिल्या रे अवधू बोल्या अरु लाधा II
जो भरे है, ज्ञानपूर्ण है, वे स्थिर गम्भीर होते है, अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते नहीं फिरते I जो अधकचरे है वे छलछलाते रहते है, चंचलतावश जगह बे जगह ज्ञान छांटा करते है I (किन्तु उससे लाभ किसी का नहीं होता ) सिद्ध ऐसे लोगो से नहीं बोलते ! हे अवधूत ! जब सिद्ध सिद्ध मिलते है, तभी उनमे वार्तालाभ संभव है I उससे उन्हें लाभ भी होता है I भरा पात्र नहीं छलकता आधा ही छलकता है I
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