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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Tuesday, April 12, 2016

Gorakh - Baani (Shabdi - 31)

धाये न षाईबा भूषेन मरिबा अहनिसि लेबा ब्रह्म अगनि का भेवं I
हठ न करिबा पड्या न रहिबा यूँ बोल्या गोरष देवं II

भोजन पर टूट नहीं पड़ना चाहिए यानि अधिक नहीं खाना चाहिए I न भूखे ही रहना चाहिए I  रात दिन ब्र्ह्माग्नि को ग्रहण करना चाहिए I  शरीर के साथ हठ नहीं करना चाहिए और न पड़ा ही रहना चाहिए I

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