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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Tuesday, April 12, 2016

Gorakh - Baani ( Shabdi - 32 )

थोड़ा बोलै थोड़ा शाई तिस घटी पवना रहे समाइ I
गगन मंडल में अनहद बाजै प्यंड पड़ै तो सतगुरु लाजै II 

जो थोड़ा बोलता और थोड़ा खाता है, उसके शरीर में पवन समाया रहता है, जिससे आकाश-मंडल ब्र्ह्मरन्ध्र में 
अनाहत नाद सुनाई देता है इसलिए अमरत्व प्राप्त करने का साधन हमारे ही पास होने पर भी यदि यह शरीर नाश हो जाये तो सद्गुरु के लिए लज्जा की बात है I

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