थोड़ा बोलै थोड़ा शाई तिस घटी पवना रहे समाइ I
गगन मंडल में अनहद बाजै प्यंड पड़ै तो सतगुरु लाजै II
जो थोड़ा बोलता और थोड़ा खाता है, उसके शरीर में पवन समाया रहता है, जिससे आकाश-मंडल ब्र्ह्मरन्ध्र में
अनाहत नाद सुनाई देता है I इसलिए अमरत्व प्राप्त करने का साधन हमारे ही पास होने पर भी यदि यह शरीर नाश हो जाये तो सद्गुरु के लिए लज्जा की बात है I
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