Featured Post

Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Wednesday, March 30, 2016

Gorakh-Baani(Sabdi-27)

हबकि न बोलिबा, ठबकि न चालिबा धीरै धारिबा पावं I 
गरब न करिबा सहजै रहिबा भणत गोरष रावं II 


सब व्यवहार 'युक्त' होने चाहिए, सोच समझ- कर करने चाहिए I  अचानक फट से बोल नहीं उठना चाहिए I जोर से पाँव पटकते हुए नहीं चलना चाहिए I धीरे धीरे पाँव रखना चाहिए I  गर्व नहीं करना चाहिए I सहज स्वाभाविक स्थिति में रहना चाहिए, यह गोरखनाथ का उपदेश(कथन) है II 

No comments:

Post a Comment