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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Tuesday, April 12, 2016

Gorakh - Baani (Shabdi - 33)

अवधू आहार तोड़ो निद्रा मोड़ो कबहुँ न होइगा रोगी I
छठे छ मासे काया पल्टिबा ज्यूँ को को बिरला बिजोगी II

हे अवधूत ! आहार तोड़ो, मिताहार करो, नींद को अपने पास न फटकने दो, छठे छ मासे कायाकल्प किया करो इससे तुम कभी रोगी नहीं होओगे कोई कोई विरले जोगी ऐसा कर सकते है I

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