Featured Post

Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Monday, March 14, 2016

Gorakh-Baani (Sabdi -22)

पंथबिन चलिबा अगनि बिन जलिबा, अनिल तृषा जहटिया 
ससंबेद श्री गुरु गोरष नाथ कहिया बूझिल्यौ पंडित पढिया I


मार्ग के बिना चलना, अग्नि के बिना जलना, वायु से प्यास का बुझना ( ठगा जाना ) - यह केवल अनुभव से जानने के योग्य है I  यह अपना अनुभव ज्ञान गुरु गोरखनाथ ने कहा है, हे पंडितो इसको समझो I



No comments:

Post a Comment