बात सहेती सब जग बास्या, स्वाद सहेता मीठा I
साच कहूं तौ सतगुरु मानै रूप सहेता दीठा II
साच कहूं तौ सतगुरु मानै रूप सहेता दीठा II
ब्रह्म की सुगन्धि से सार जगत सुगन्धित है I वह जगत में सुगन्धि के समान व्याप्त है I उसके स्वाद से सारा जगत मीठा है I जिसको ब्रह्मानंद का आस्वाद मिल जाता है उसके लिए संसार के आत्यन्तिक दुःख की कटुता मिट जाती है, और जगत आनंदमय (मीठा ) हो जाता है I (क्योकि समस्त जगत में उसे) उसी का रूप दिखाई देता है I ( उसके रूप से जगत सुन्दर है ) I इस सत्य का विश्वास केवल सद्गुरु को हो सकता है I
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