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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Thursday, March 24, 2016

Gorakh-Baani(Sabdi-25)

बात सहेती सब जग बास्या, स्वाद सहेता मीठा I 
साच कहूं तौ सतगुरु मानै रूप सहेता दीठा II 

ब्रह्म की सुगन्धि से सार जगत सुगन्धित है I वह जगत में सुगन्धि के समान व्याप्त है I  उसके स्वाद से सारा जगत मीठा है I जिसको ब्रह्मानंद का आस्वाद मिल जाता है उसके लिए संसार के आत्यन्तिक दुःख की कटुता मिट जाती है, और जगत आनंदमय (मीठा ) हो जाता है I (क्योकि समस्त जगत में उसे) उसी का रूप दिखाई देता है I ( उसके रूप से जगत सुन्दर है ) I  इस सत्य का विश्वास केवल सद्गुरु को हो सकता है I   

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