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Gorakh-Baani( Sabdi-26)

मरौ वे जोगी मरौ, मरण है मीठा I  तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरष मरि दीठा II  है जोगी !  मरो, मरण मीठा होता है I  किन्तु वह मौत मरो जिस मौत ...

Monday, March 14, 2016

Gorakh-Baani(Sabdi-23)

गगन मंडल मै ऊंधा कूबा तहाँ अंम्रत का बासा I 
सगुरा होइ सु भरि भरि पीवै निगुरा जाइ प्यासा II 

आकाश मंडल यानी शून्य अथवा ब्रह्म्मरन्ध्र में एक औन्धे मुँह का कुआँ है, जिसमे अमृत का वास है I जिसने अच्छे गुरु की शरण ली है वही उसमे से भर-भरकर अमृत पी सकता है क्योकि उसे पीने का उपाय गुरु ही बता सकता है I जिसने किसी अच्छे गुरु को धारण नहीं किया वह इस अमृत का पान नहीं कर सकता, प्यासा ही रह जाता है I 

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